चंडीगढ़ हवाई अड्डे की सुरक्षा को लेकर लोकसभा में उठे सवाल, मनीष तिवारी ने आधुनिक नेविगेशन प्रणाली की मांग की
Security at Chandigarh Airport
चंडीगढ़, 30 जनवरी: Security at Chandigarh Airport: चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमानों की सुरक्षित लैंडिंग और आधुनिक नेविगेशन प्रणाली लागू करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। बारामती हवाई अड्डे पर हुए हालिया विमान हादसे के बाद उत्पन्न सुरक्षा चिंताओं के मद्देनज़र उन्होंने हवाई अड्डों पर प्रचलित पुरानी तकनीक को हटाकर सैटेलाइट आधारित आधुनिक नेविगेशन प्रणाली को प्राथमिकता देने की मांग की।
लोकसभा में पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा पुराने हो चुके नॉन-डायरेक्शनल बीकन (NDB) को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप जैसे देशों ने भी इन प्रणालियों को हटाकर सैटेलाइट आधारित नेविगेशन व्यवस्था को अपनाया है।
वायु सेना के नियंत्रण में है चंडीगढ़ हवाई अड्डा
केंद्रीय मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भारतीय वायु सेना के अधीन है, जहां नागरिक उड़ानों के संचालन के लिए एक अलग सिविल एन्क्लेव बनाया गया है।
वर्तमान में वायु सेना द्वारा रनवे नंबर 29 पर रात में विमानों की लैंडिंग के लिए इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम कैट–II की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा रनवे नंबर 11 पर आईएलएस कैट–I और संबंधित अप्रोच लाइट व्यवस्था की गई है।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि यह वायु सेना का हवाई अड्डा है, इसलिए हवाई यातायात सेवाओं और नेविगेशन प्रक्रियाओं को लागू करने का अधिकार क्षेत्र वायु सेना के पास है।
आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर
सरकार ने अपने जवाब में यह भी स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन मानकों के अनुसार आरएनएवी और आरएनपी आधारित परफॉर्मेंस बेस्ड नेविगेशन प्रणालियों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है। उदाहरण देते हुए बताया गया कि सिंधुदुर्ग हवाई अड्डे पर पहले से ही सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रक्रियाएं लागू हैं, जिससे जमीनी उपकरणों पर निर्भरता कम हुई है।
सांसद मनीष तिवारी ने जोर देकर कहा कि चंडीगढ़ सहित देश के अन्य क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीकों को तुरंत अपनाया जाना चाहिए, ताकि खराब मौसम, तकनीकी खामियों या नेविगेशन सीमाओं के कारण होने वाले हादसों और उड़ानों के डायवर्जन को रोका जा सके।